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दामुल का कैदी

Munshi Premchand - the Great Hindi Story Writer दस बजे रात का समय एक विशाल भवन में एक सजा हुआ कमरा बिजली की अँगीठी बिजली का प्रकाश। बड़ा दिन आ गया है। सेठ खूबचन्दजी अफसरों को

मुहावरे (Muhavare) (Idioms)

Learn Hindi Grammar online with example all the topic are described in easy way for education Muhavare in Hindi (मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग) मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग इन हिन्दी भाषा की समृद्धि और उसकी

अमृत की दिशा

रविवार 1 जुलाई 2018 अमृत की दशा-(प्रवचन-05) प्रवचन--पांचवां मैं विचार में हूं--किस संबंध में आपसे बातें करूं। और बातें इतनी ज्यादा है

महाशक्ति 05 10

कौन किसको कितनी गाली दे सकता है ? क्‍या इन प्रक्रियाओ से हिन्‍दी ब्‍लागिंग का उन्नयन होगा ? न ही छोटो को बड़ो का कोई लिहाज है और नही बड़ो का बडप्‍पन है सब �

Uttamkshama

अर्थ- जैसे शराब के मद में जीवों की दशा होती है उसी प्रकार क्रोध के समय आंखों लाल हो जाती है शरीर कांपनो लगता हृदय की धड़कने बढ़ जाती है मन का विवके खो

माह की कविताएँ

अलग-अलग हैं कितनी बातें क्या-क्या हैं नए सन्दर्भ विषयों की विविधता इतनी चुनना बना जी का जाल। दुःख पे जाऊं जो लम्बे समय तक रहता है याद या सुख पे जो विस्�

10 अभ्यास जो आपकी बाहों को थकावट के लिए काम करते

जब अधिकांश लोग अच्छे पंप के परिणाम आकार देते हैं तो वे सबूत के लिए हथियारों को देखते हैं। Popeye- योग्य biceps और रेज़र-तीखे triceps के बारे में कुछ है जो कसरत के सबूत

महाशक्ति 05 10

कौन किसको कितनी गाली दे सकता है ? क्‍या इन प्रक्रियाओ से हिन्‍दी ब्‍लागिंग का उन्नयन होगा ? न ही छोटो को बड़ो का कोई लिहाज है और नही बड़ो का बडप्‍पन है सब �

मुक्ति

उसकी सारी कमाई खेतों में रहती है या खलिहानों में। कितनी ही दैविक और भौतिक आपदाओं के बाद कहीं अनाज घर में आता है। और जो कहीं इन आपदाओं के साथ विद्रोह ने

भारतीय किसान और उनकी मूलभूत समस्याएं

देश की 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और कृषि पर ही निर्भर है। ऐसे में किसानों की खुशहाली की बात सभी करते हैं और उनके लिए योजनाएं भी बनाते हैं किंतु

कहानी

संध्या का समय था। कचहरी उठ गयी थी। अहलकार और चपरासी जेबें खनखनाते घर जा रहे थे। मेहतर कूड़े टटोल रहा था कि शायद कहीं पैसे-वैसे मिल जायँ। कचहरी के

माह की कविताएँ

अलग-अलग हैं कितनी बातें क्या-क्या हैं नए सन्दर्भ विषयों की विविधता इतनी चुनना बना जी का जाल। दुःख पे जाऊं जो लम्बे समय तक रहता है याद या सुख पे जो विस्�

Spritual Quest 2010

हमारे दैनिक जीवन में ही कितनी जटिलताएं आती है हम उनको ही अगर विवेक से सुलझा सके तो भी हमारी मेधा का सही उपयोग हो । हानि होने पर हारे नही लाभ होने पर आगे

Samay Bahata Hua Durga Prasad Shukla ka Lalit Nibandh

जीवन वैसे ही चलता रहता है कोल्हू के बैल की तरह! सोचता हूँ काश कोल्हू के बैल की तरह मेरी आँख पर भी पट्टी बँधी होती तब यह भान ही नहीं होता कि कितना सफ़र किया

HINDI AND HINDI premchand ke upanyas GODAN

मेरी लाठी दे दे और अपना काम देख। यह इसी मिलते-जुलते रहने का परसाद है कि अब तक जान बची हुई है नहीं कहीं पता न लगता किधर गये। गाँव में इतने आदमी तो हैं किस पर

व्यंग्य संग्रह

रचनाकार - विश्व की पहली यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित लोकप्रिय ई-पत्रिका यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज

शनि (ज्योतिष)

शनि ग्रह के प्रति अनेक आखयान पुराणों में प्राप्त होते हैं।शनिदेव को सूर्य पुत्र एवं कर्मफल दाता माना जाता है। लेकिन साथ ही पितृ शत्रु भी शनि ग्रह के

मुक्ति

उसकी सारी कमाई खेतों में रहती है या खलिहानों में। कितनी ही दैविक और भौतिक आपदाओं के बाद कहीं अनाज घर में आता है। और जो कहीं इन आपदाओं के साथ विद्रोह ने

गोदान (भाग 1)

छिपाये लेता था विपन्नता के इस अथाह सागर में सोहाग ही वह तृण था जिसे पकड़े हुए वह सागर को पार कर रही थी इन असंगत शब्दों ने यथार्थ के निकट होने पर भी मानो झ�

गोदान (भाग 1)

छिपाये लेता था विपन्नता के इस अथाह सागर में सोहाग ही वह तृण था जिसे पकड़े हुए वह सागर को पार कर रही थी इन असंगत शब्दों ने यथार्थ के निकट होने पर भी मानो झ�

हर्ष कुमार की कविताएं 2009

यह मेरी कविताओं का छोटा संग्रह है। अपने विचार जरूर व्यक्त करें मुझे प्रसन्नता होगी। Thursday November 19 2009 लालच की पूजा सुनते हैं भगवान होता है गरीब का अन्नदाता �

सिमट रही है आज अंजरि मेंं उनकी धरा

हरियाणवी अंचल के गांवों में वैश्वीकरण के दानवी पंजे ने सदियों से चले आ रहे लोकजीवन के ताने-बाने को पूरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने

भूमण्डलीकृत भारत का किसान और संजीव का कथा

आज तक कोई यह नहीं जान सका कि उनकी जमीन कितनी है और कितनी हैं औरतें! जानने का सवाल ही पैदा नहीं होता हदबंदी के बाद की जमीन दूसरों के नाम है जो उन्हीं के यहा

Body osho'S'word

पता नहीं कैसा है आदमी कि फिर—फिर भरोसा कर लेता है! वही भूलें वही भरोसे कुछ नया नहीं। वर्तुल में घूमता रहता है—कोल्हू के बैल की भांति घूमता रहता है। क्या

के बारे में समाचार कोल्हू कितनी शक्ति लेता है

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