मूल्य और समर्थन प्राप्त करें

July 2016 – dariyavji

10 posts published by Govats Radhe during July 2016 घास-पात भी उगता है। उसी भूमि में जहां गुलाब के फूल खिलते हैं। दोनों में एक अर्थ में कुछ भेद नहीं। दोनों एक ही भूमि से रस लेते हैं और

Hindisamay समग्र साहित्य सबके लिये

(दर्शकों की ओर से एक करते थे। बताते हैं कि एक बहुत बड़े ऐय्याश ने वहाँ ऐसा डेरा जमाया कि तीन हफ्ते तक उसने दिन का उजाला भी नहीं देखा। जितना ही हम पश्चिम क

काव्य संसार अगस्त 2015

2015-08-31जब तीर नयन के चलते है तो सीधे दिल पर लगते है दिल की घंटी बजती है पर ना शोर शराबा करते है सच तो ये है कि हमको भी वो चोट सुहानी लगती है हालांकि घायल होने का ह�

February 2011 ~ ब्लॉग 4 वार्ता

2011-02-28सभी को ललित शर्मा का नमस्कार चलते हैं आज लेट लतीफ़ वार्ता पर जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है इस पर चिंताए व्यक्त की जा रही हैं कहते हैं 2020 तक हाहाकार

इप्टानामा May 2013

2013-05-31बहुत सारे लोग यह कहते हुए पाए जाते हैं कि ये बुद्धिजीवी है मध्यम वर्ग के लोग हैं पढ़े-लिखे लोग हैं इनका जनता से कोई सरोकार नहीं है। मैं इस से थोड़ा मतभेद

विविध 2015

कबीर साहब धर्मदास से कहते हैं कि - 3 अंगुल का यकृत 'पित्त का थैली' है । तथा 5 अंगुल का हृदय है । 7 अंगुल के फेफङे हैं । जिनमें 7 समुद्र हैं कृमश - क्षार मदिरा क�

जै जै! 2009

कहते हैं कि महाराष्ट्र में वोट गन्ने की पोरों से निकलते हैं। वो गन्ना जिसे चलते ट्रैक्टर से खींचने के लिए आप भी कभी इसके पीछे दौड़े

इप्टानामा May 2013

2013-05-31बहुत सारे लोग यह कहते हुए पाए जाते हैं कि ये बुद्धिजीवी है मध्यम वर्ग के लोग हैं पढ़े-लिखे लोग हैं इनका जनता से कोई सरोकार नहीं है। मैं इस से थोड़ा मतभेद

चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा (5)

रचनाकार - विश्व की पहली यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित लोकप्रिय ई-पत्रिका यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज

ओशो सत्‍संग/ OSHO SATSANG रामदूवारे जो मरे

जोगी तु क्यों आया मेरे द्वारा। तेरी आंखों में नहीं दिखता सपनों का अब वो संसार। जोगी तु क्यों आया मेरे द्वार

JAI GURU GEETA GOPAL May 2016

इसके पीछे जितने भी कारण हैं उसमें से एक बड़ा है तन और मन की शुद्धि। यहां आने पर शोर भी मिलेगा लेकिन ये साधु लोग दिल का इक तारा इस तरह से बजा रहे हैं कि यदि इ

इंकलाब ज़िंदाबाद ! February 2015

चौथी बात-केजरीवाल की ज़बर्दस्त जीत ने यह दिखलाया है कि पूँजीवादी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था के संकट और अन्तरविरोध जब-जब एक हद से ज़्यादा बढ़ते हैं तो

October 2011

2011-10-18जब हम इतिहास की बात करते हैं तो वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ई पू से मानी है। अर्थात यह धीरे-धीरे रचे

बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर

किसी भी प्रगति क्षेत्र में कदम बढ़ाने से पूर्व यह सोचा और देखा जाना चाहिए कि इस प्रयास की आरम्भिक उपलब्धियाँ आकर्षक होते हुए भी क्या उसकी अन्तिम

विविध जुलाई 2015

- इलाके में फिर से तेलियाकंद उगने लगा है । सब उसी का चूरन फांक रही हैं । पानी के साथ एक फंकी मार लेने से एक महीने तक गर्भ नहीं ठहरता । उन्होंने सहमे हुए भेद

अदब से मुठभेड़ किताब में ओमा शर्मा द्वारा

शिवमूर्ति हमारे समय के ऐसे लेखकों में समादृत हैं जिनकी हर रचना का पाठकों को इंतजार करना पड़ता है। उनके पाठकों का एक विशाल और स्थाई वर्ग है। यूँ परिमाण

ओशो सत्‍संग/ OSHO SATSANG ईशावास्‍य उपनिषाद

इस इस घड़ी को ऋषि व्यंग्य बनाए दो कारणों से — एक तो अपने मन के लिए और एक उनके मन के लिए भी जो अभी समाधि के द्वार तक तो नहीं पहुंचे हैं लेकिन कर्म कर रहे

शिक्षा केवल ज्ञान

पांड्या डॉक्टर होने के साथ-साथ एक जाने-माने तंत्रिका विज्ञानी हैं जो कि भारत के गुजरात राज्य से तालोक्कात रखते हैं। उनकी मां का नाम बॉनी जालोकर

October 2011

जब हम इतिहास की बात करते हैं तो वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ई पू से मानी है। अर्थात यह धीरे-धीरे रचे

KWIC (UTF

से एक पैसा क़र्ज़ न ले से प्यारे हैं। यह है उसका जीवन जिसके लिए कोई चार बूँद आँसू 60801 test‏ htm और हज़ारों आदमियों को आज जीवन-दान दे रही है यह सब कुछ नहीं 608

desiCNN

लेकिन न तो इस मामले में आगे कुछ हुआ न ही किसी मंत्री-अफ़सर का इस्तीफ़ा हुआ। इस विमान दुर्घटना के कई पहलुओं में से एक महत्वपूर्ण पहलू को मीडिया ने पूरी

Agri Commodity News English

2011-01-31प्याज के आंसू अभी ठीक से रुके भी नहीं हैं कि दाल की कीमतें लोगों को बेहाल करने लगी हैं। दो सप्ताह के अंदर अरहर (तुअर) दाल 30 फीसदी से भी ज्यादा महंगी हो गई

इप्टानामा May 2013

2013-05-31बहुत सारे लोग यह कहते हुए पाए जाते हैं कि ये बुद्धिजीवी है मध्यम वर्ग के लोग हैं पढ़े-लिखे लोग हैं इनका जनता से कोई सरोकार नहीं है। मैं इस से थोड़ा मतभेद

JAI GURU GEETA GOPAL May 2016

इसके पीछे जितने भी कारण हैं उसमें से एक बड़ा है तन और मन की शुद्धि। यहां आने पर शोर भी मिलेगा लेकिन ये साधु लोग दिल का इक तारा इस तरह से बजा रहे हैं कि यदि इ

के बारे में समाचार कोल्हू एक खदान से चलते हैं

कोल्हू पत्थर कुचल मशीन प्रभाव है

कोल्हू मशीन कोयला हाइड्रोलिक कोल्हू

क्रैडल में बिक्री के लिए कोल्हू

कोल्हू 150 टन घंटे रसिया

कोल्हू काम करने के 2 सिद्धांत

दक्षिण में बनी क्रेशर मशीन

कोल्हू और कन्वेयर क्रशर और

बिक्री के लिए कोल्हू मशीन रेत है

कोल्हू जबड़े कोल्हू स्पेयर पार्ट्स

मुंबई में कोल्हू निर्माता

2013 और 2014 में क्रशर

बिक्री के लिए डोलोमाइट के लिए कोल्हू

मध्य पूर्व में कोल्हू मशीन

कोल्हू संयंत्र उत्पादन लाइन निर्माता है

भारत अयस्क कोल्हू में कोल्हू

के साथ बिक्री के लिए कोल्हू के पौधे

गणराज्य में कोल्हू निर्माण

कोल्हू शुरू करने और प्रक्रिया को रोकने

कोल्हू संयंत्र दैनिक उत्पादन

कोल्हू कोल्हू जबड़े कोल्हू पत्थर है