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रामचंद्र शुक्ल — साहित्य गंगा

हिंदी साहित्य का इतिहास रस मीमांसा चिंतामणि (3 खंड) मौलिक कृतियाँ तीन प्रकार की हैं–

कहानी

इन दिनों आप हर सोमवार को युवा कहानीकारों की कहानियों का आनंद ले रहे हैं। अब तक हम आपको शशिभूषण द्विवेदी की कहानी 'एक बूढ़े की मौत' और गौरव सोलंकी की कहानी

कहानी

दोस्तो किन्हीं तकनीकी कारणों से हम सोमवार की कहानी को ठीक समय पर नहीं प्रकाशित कर सके उस बात का हमें खेद है। युवा कहानीकारों की कहानियों के प्रकाशन की

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रामप्रसाद मिश्र उर्फ रामूजी(गया वाले) बेगम अख्तर शोभा गुर्ट गिरिजा देवी आश्रया पाण्डेय उर्मिला श्रीवास्तव आदि के स्वरों में

प्रेमचंद की महान कथाएँ

मेरा कहना मानो इस छुट्टी में न जाओ इम्तसहान के बाद जो छुट्टी पड़े उसमें चले जाना। ईस्टर की चार दिन की छुट्टी होगी मैं एक दिन के लिए

रामचंद्र शुक्ल — साहित्य गंगा

हिंदी साहित्य का इतिहास रस मीमांसा चिंतामणि (3 खंड) मौलिक कृतियाँ तीन प्रकार की हैं–

AAJ KE DAUR KI RAGNI 01/01/2017

रोजगार कोए थयावै ना रूखी सूखी रोटी म्हारी कहैं कामचोर दारू बाज काम नै ना करै जी तेरा।। दिन रात मण्डी रैहवै बीमारी मैं भी घरआली या भैंस पाल दूध बेचकै नै क�

कहानी

इन दिनों आप हर सोमवार को युवा कहानीकारों की कहानियों का आनंद ले रहे हैं। अब तक हम आपको शशिभूषण द्विवेदी की कहानी 'एक बूढ़े की मौत' और गौरव सोलंकी की कहानी

विक्षनरी हिन्दी

संज्ञा पुं० [फा०] २ भाला। बरछा। २ साँग। निशान। मुहा०—नेजा हिलाना = बरछा था बल्लम फिराना। ३ चिलगोजा नाम की सूखी फली या मेवा

विक्षनरी हिन्दी

बाँस सूखी लकड़ी आदि का कड़ा तँतु जो शरीर में चुभ जाता है। बाँस या काठ का कड़ा रेशा जिसकी नोक काँटे की तरह हो जाती है। महीन काँटा। उ०—(क

Kahani Suno

एक बहू पशु-पक्षियों की भाषा जानती थी। आधी रात को श्रृगाल को यह कहता सुनकर कि नदी का मुर्दा मुझे दे दे और उसके गहने ले ले नदी पर वैसा करने गई। लौटती बार

अलंकार उपन्यास

यह कहकर संत पालम ने फिर कुदाल हाथ में ली और धरती गोड़ने लगे। वह फल से लदे हुए एक अंजीर के वृक्ष की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा रहे थे। वह कुदाल चला ही रहे थे कि

अलंकार उपन्यास

यह कहकर संत पालम ने फिर कुदाल हाथ में ली और धरती गोड़ने लगे। वह फल से लदे हुए एक अंजीर के वृक्ष की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा रहे थे। वह कुदाल चला ही रहे थे कि

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डॉक्टर साहब ने जो उर्दू के शब्द भंडार की बात कही वह भी विलक्षण ही है। हिन्दी शब्दों के सिवाय जो शब्द उर्दू में हैं वे अरबी फारसी तुर्की आदि के हैं। ये

विक्षनरी हिन्दी

⋙ नी वि० [सं०] नेता। प्रधान। अगुआ। समासांत में प्रयुक्त। जैसे ग्रामणी सेनानी अग्रणी [को०]। रहते हैं वहाँ उनसे कई बार काटकर पत्तियाँ आदि ली जाती हैं। प�

अलंकार उपन्यास

यह कहकर संत पालम ने फिर कुदाल हाथ में ली और धरती गोड़ने लगे। वह फल से लदे हुए एक अंजीर के वृक्ष की जड़ों पर मिट्टी चढ़ा रहे थे। वह कुदाल

विक्षनरी हिन्दी

किसी मोल ली हुई वस्तु का अस्वीकृत होकर बेचनेवाले को फिर दे दिया जाना। वापस होना। जैसे —जब सौदा हो गया तब चीज नहीं फिर सकती। संयो० क्रि०—जाना। ७ एक ही स्�

प्रेमचंद की महान कथाएँ

मेरा कहना मानो इस छुट्टी में न जाओ इम्तसहान के बाद जो छुट्टी पड़े उसमें चले जाना। ईस्टर की चार दिन की छुट्टी होगी मैं एक दिन के लिए

गोदान उपन्यास

होरी क़दम बढ़ाए चला जाता था। पगडंडी के दोनों ओर ऊख के पौधों की लहराती हुई हरियाली देख कर उसने मन में कहा - भगवान कहीं गौं से बरखा कर दे

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